Monday, January 24, 2022
Homeबिहारविश्व दिव्यांग दिवस पर मुंगेर के युवक की प्रेरणादायक दास्तान

विश्व दिव्यांग दिवस पर मुंगेर के युवक की प्रेरणादायक दास्तान

विश्व दिव्यांग दिवस पर मुंगेर के 90 प्रतिशत दिव्यांग आमिर उल इस्लाम जब छोटा था उसके दोनों पैर पोलियो की बीमारी की वजह से अपाहिज बना दिया

लगभग डेढ़ दशक घर पर ही रहा जब बाहर निकला तो कुछ कर गुजरने की तमन्ना मन में जागी प्राइवेट से मैट्रिक परीक्षा के साथ शिक्षा ग्रहण किया

कभी स्कूल कॉलेज ना जाने के बावजूद भी सेकंड डिवीजन से मैट्रिक पास किया उसके बाद क्रिकेट कॉमेंट्री एवं सामान्य लोगों में बेधड़क क्रिकेट ने एक पहचान दीया

लेकिन उनके जीवन में भगवान की परीक्षा हमेशा चलता रहा पहले पिताजी उसके बाद बड़े भाई फिर बहन को दुनिया से रुखसत हो जाना आमिर को पूरी तरह उदास कर गया

बहुत संघर्ष के बाद भी प्रतिभा होने के बावजूद किसी ने काम पर नहीं रखा तो उन्होंने मोबाइल नंबर एकत्रित कर टेलीकॉलिंग के माध्यम से प्रचार प्रसार कर अपना पॉकेट खर्च निकालने लगा आमिर

वार्ड आयुक्त चुनाव भी लड़ा लेकिन लोगों ने इन्हें नहीं मौका दिया आमिर ने एक मजबूत सोच लिए पिछले 10 सालों से समाज के लिए बेहतरीन योगदान दे रहा है खेलकूद को बढ़ावा एवं स्वयं क्रिकेटर उद्घोषक एवं कवि के रूप में जाने जाते हैं

रात रोजाना 50 से भी अधिक लोगों तक हर घर से भोजन एकत्रित कर जरूरतमंदों तक पहुंचाना खुद रक्तदान करते हैं और और लोगों को भी रक्तदान के लिए जागरुक कर अद्भुत कार्य कर रहे हैं आमिर गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा पुराने कपड़े के माध्यम से जरूरतमंदों तक कपड़े पहुंचाना सर्दी में कंबल फेस्टिवल्स में कपड़ेें गरीब बेटियों की शादी में लोगों की मदद से आर्थिक सहयोग बीमार को इलाज के लिए सहयोग एवं माननीय मानवीय कार्य एक मजबूत सोच के बाद ही हम से कर रहे हैं आमिर

जॉब प्लेसमेंट- आपको किसी चीज की जरूरत है स्कूल में शिक्षक, गार्ड, दुकानमें काम करने वाला स्टाफ, ड्राइवर, ट्यूशन पढ़ाने वाला, राजमिस्त्री, पलंबर मिस्त्री, इलेक्ट्रीशियन, एवं लोगों को काम करते हुए वीडियो बनाकर के यह अनुभव ईमानदार एवं सामाजिक राजमिस्त्री हैं या इलेक्ट्रीशियन हैं या गार्ड है वह मोबाइल पर बैठे-बैठे ही उनकी क्वालिटी को देख लेते हैं कि यह मिस्त्री कैसा है और किस तरह से काम को अंजाम देगा

इस तरह का लोगों को सेवा भी देते हैं और यही बहाने बहुत सारे लोगों को छोटा-मोटा रोजगार मिल रहा है समाज एवं राष्ट्र के लिए समर्पित आमिर उल इस्लाम शिक्षिका रुखसार फातमा से कुछ महीने पूर्व निकाह भी किया वह भी इनका भरपूर सहयोग करती है और कदम से कदम मिलाकर दोनों समाज के लिए अतुलनीय योगदान दे रहे इनके जज्बे को लाखों सलाम

नोट आमिर उल इस्लाम कहते हैं कि वह कभी अपने आप को दिव्यांग महसूस नहीं करते लेकिन एक वक्त महसूस करते हैं कि जब राष्ट्रगान के लिए सम्मान को सब लोग खड़े हो जाते हैं और वह खड़े नहीं होते तो कहते हैं कि या अल्लाह तू मुझे 52 सेकंड के लिए दोनों पैर दे दो ताकि मैं खड़ा हो सकूं फिर ले ले आमिर ने कहा मेरा सारा काम राष्ट्र एवं समाज के प्रति समर्पित है और मेरे के अंदर से एक सुखद एहसास एवं जय हिंद जैसी भावना पैदा होती है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments