Sunday, January 17, 2021
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बिहार में विधान पार्षद चुनाव में एनडीए को लग सकता है झटका, महागठबन्धन को मिल सकता है फायदा:- बाबा-भागलपुर

भागलपुर, बिहार। बिहार विधान परिषद की दो सीटों पर 11 जनवरी 2021 को नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, जो 18 जनवरी 2021 तक चलेगी। 19 जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच होगी, 21 जनवरी 2021 को प्रत्याशी अपना नाम वापस ले सकेंगे। अगर किसी सीट पर दो से ज्यादा प्रत्याशी उतरते हैं तो 28 जनवरी 2021 को मतदान होगा। गौरतलब है कि बिहार विधान परिषद में दो सीटें खाली हैं। पहली सीट बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री, सुशील कुमार मोदी के राज्यसभा सदस्य चुने जाने से खाली हुई। वहीं, दूसरी सीट खाली होने की वजह विनोद नारायण झा हैं, जो विधायक निर्वाचित हुये हैं। विदित हो कि विनोद नारायण झा की सीट का कार्यकाल 21 जुलाई 2022 तक है, जबकि सुशील कुमार मोदी की सीट का कार्यकाल छह मई 2024 तक रहेगा।
इस सम्बन्ध में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त ज्योतिष योग शोध केन्द्र, बिहार के संस्थापक दैवज्ञ पं. आर. के. चौधरी उर्फ बाबा-भागलपुर, भविष्यवेत्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ ने सुगमतापूर्वक बतलाया कि:- ग्रहों की स्थिति विशेषानुसार नीतीश कुमार का करिश्मा ढलान पर है तो वहीं अंदरूनी चोट व संख्या बल के हिसाब से भी एनडीए को एमएलसी चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है और इसका सीधा फायदा महागठबन्धन के गटक दल राजद को मिल सकता है।
बिहार में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा नेताओं में अति उत्साह है। अति सर्वत्र वर्जयेत्। अर्थात्:- अधिकता सभी जगह बुरी होती है। अब भाजपा को विधान पार्षद चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। दरअसल, बिहार में विधान परिषद की दो सीटों पर 28 जनवरी 2021 को चुनाव होना है, जिनमें एक सीट भाजपा से छिनना तय है। माना जा रहा है कि यह सीट राजद की झोली में जा सकती है।
बिहार विधान परिषद में सीटों पर विधान पार्षद का चुनाव विधानसभा में सदस्यों (विधायकों) के संख्या बल के आधार पर होता है। इसके तहत विधान परिषद की सीटें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बँट जाती है। फलसक 28 जनवरी 2021 को होने वाले चुनाव में भाजपा को अपनी एक सीट गंवानी पड़ सकती है, क्योंकि सत्तापक्ष की ओर से भाजपा अपना कोई प्रत्याशी उतार सकती है, क्योंकि यह सीट उसके कोटे से खाली हुई है। इसका सीधा फायदा विपक्ष को मिल सकता है, क्योंकि दूसरी सीट पर विपक्ष दावेदारी करेगा। माना जा रहा है कि राजद बिहार की सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में वह अपना प्रत्याशी उतार सकती है।
बिहार में एनडीए के पास 126 विधायकों का समर्थन है, जबकि महागठबंधन के साथ 110 विधायक हैं। वहीं, सात अन्य विधायक हैं। बिहार की कुल 243 सदस्यीय विधानसभा में प्रथम वरीयता के लिए कम से कम 122 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में भाजपा अपने सहयोगी जदयू, हम और वीआईपी के सहयोग के एक सीट पक्की कर लेगी। लेकिन दूसरी सीट जीतने के लिए उसके पास संख्या नहीं है। ऐसे में सम्पूर्ण विपक्ष एकजुट होकर दूसरी सीट पर जीत दर्ज कर सकता है। जो राजद के खाते में होगी। इसलिए बिहार में विधान पार्षद चुनाव में एनडीए को लग सकता है झटका, महागठबन्धन को मिल सकता है फायदा।

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