Monday, January 18, 2021
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“नेता को यदि पता होता नेता की परिभाषा”


ब्रह्मलीन बलदेव प्रसाद मोदी का 88वां जयंती समारोह बी.पी.मोदी फाउंडेशन के बैनर तले अध्यक्ष नरेश कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में अनिश्चितकालीन धरना स्थल पर मनाते हुए एक कवि-गोष्ठी आयोजित की गई। संचालन उनके पुत्र एनसीपी श्रमिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष संजय केशरी कर रहे थे। बी.पी.मोदी फाउंडेशन के महासचिव महासचिव सुबोध छवि ने कहा “नेता को यदि पता होता नेता की परिभाषा, तो ना देश की यह दुर्दशा होती और ना होता पार्लियामेंट में तमाशा। लब्धप्रतिष्ठित कवि ज्योति कुमार सिन्हा ने समां बांधते हुए फ़रमाया “मेहनतकश की बस्ती में कहां तपती दोपहर देखते हैं, रूखसार की सुर्खियां नहीं हम दस्ते हुनर देखते हैं”। मो० आमिरुल इस्लाम ने कहा “ना पेड़ है पैसों का नाम सोने की खान है, ऊंचाइयों पर काम करते हैं हथेलियों पर जान है” तो डॉ० हेमंत ने फ़रमाया ” आजकल हर शख्स का धुंधला किरदार क्यूं है और पैसों पर बिक रहा बाजार में प्यार क्यूं है”। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए ब्रह्मलीन बी.पी.मोदी के मित्र शालिग्राम केशरी ने कहा कि उनका सूत्र वाक्य था “मुसीबत में जो देता है उसी को दान कहते हैं, पराए दु:ख को जो समझे उसे इंसान कहते हैं”।
कवि गोष्ठी में संरक्षक गिरिजा शंकर नलिन, अंतरराष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र, भोजपुरिया फिल्म छेका के हीरो विक्टर सिंह प्रताप, सुनील कुमार सिंह, मनोरंजन कुमार सिंह, सुबोध तांती, राजीव कुमार शर्मा, अजय कुमार सिंह, आजाद शर्मा, महिला नेत्री सोनी सिन्हा, रोबिन शर्मा, पप्पू मंडल, दयानंद यादव, मनोज पासवान, संगठन कुमार एवं संतोष केशरी सहित अनेकों लोग उपस्थित थे।

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